आज बून्दी महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर छोटी काशी में उपस्थित रहकर इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बना। यह सतरंगी पर्व बून्दी के इतिहास, लोक संस्कृति और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। हाड़ी रानी की वीरभूमि बून्दी केवल एक ऐतिहासिक नगर नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, स्वाभिमान और गौरव की धरोहर है। यहाँ की हवेलियाँ, दुर्ग, बावड़ियाँ और मंदिर अतीत की गौरवगाथा कहते हैं, वहीं लोककला और संस्कृति की गूंज आज भी हर कोने में जीवंत है।
बून्दी महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह परंपरा और संस्कृति का उत्सव है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और नई पीढ़ी को अपनी पहचान पर गर्व करना सिखाता है। यह महोत्सव लोक कलाकारों और शिल्पकारों के परिश्रम का सम्मान है। बून्दी को पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं। चारभुजा नाथ जी से कामना है कि यह महोत्सव बून्दी की खुशहाली, एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का संदेश पूरे देश में फैलाए। बून्दी महोत्सव की समस्त हाड़ौती वासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
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