Guru Ravidas Jayanti
जिह्वा सों ओंकार जप, हत्थन सों कर कार।
राम मिलिहि घर आइ कर, कहि रैदास विचार॥
भक्ति, करुणा और सामाजिक समरसता के दिग्दर्शन संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।
समानता, बंधुत्व और मानव-मर्यादा के आलोक से भरे उनके उपदेश आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने भेदभाव, छुआछूत और कुरीतियों के विरुद्ध अदम्य साहस से संघर्ष किया और सेवा, सौहार्द तथा बंधुत्व की ऐसी धारा प्रवाहित की, जो युगों-युगों तक जनमानस का पथ प्रशस्त करती रहेगी। उनकी शिक्षाएँ एवं उनके विचार हमारे सामाजिक और नैतिक मूल्यों को निरंतर उज्ज्वल बनाते रहेंगे
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